हिन्दी मासिक पत्रिका < सुविचार> <यदी आप किसी के लिये अच्छा नही कह सकते, तो कुछ न कहना बेह्तर है > < केवल जुटाओगे तो बोझ बढ़ेगा, केवल लुटाओगे तो खोखले हो जायोगे। दोनों का संतुलन ही स्वस्थ जीवन है। >< संकल्पबद्ध होकर किसी कार्य की सिद्धि के लिए किया गया पुरुषार्थ ही व्रत है जबकि उपवास निराहार रहकर आत्मबल बढ़ाने की प्रक्रिया है। < > मल्लाह वही है जो लहरों से खेले। जो ड़र गया वह ड़ूब गया। जो हर समय दूसरों के दोष देखता है वह अपनी पहचान खो बैठता है। < सुविचार> यदि आप किसी उंचाई पर पहुंचना चाहते हैं तो दूसरों के आरोपों से न ड़रें क्योंकि लोग उसी पेड़ पर पत्थर मारते हैं जिन पर फल लगे होते हैं। < सुविचार> कल्पना शक्ति से समस्याओं का हल ढूंडा जा सकता है। हिन्दी मासिक पत्रिका < सुविचार> बुराईयों की तरफ से आँख बन्द करें तथा अच्छाईयो की तरफ ध्यान लगायें। हिन्दी मासिक पत्रिका < सुविचार> ईर्ष्या की चिंगारी जीवन को नष्ट कर देती है। हिन्दी मासिक पत्रिका < सुविचार अच्छी मित्रता दुर्लभ और कीमती चीज़ है। हिन्दी मासिक पत्रिका < सुविचार > ज्ञान ऐसी दौलत है जिसे कोई चुरा नही सकता। हिन्दी मासिक पत्रिका < सुविचार> खुशी तब तक अधूरी है जब तक बाँटी न जाये। हिन्दी मासिक पत्रिका < सुविचार> वक्त हालात बदलते है, हालात इंसान बदल देते है। हिन्दी मासिक पत्रिका < सुविचार> दूसरों की गलतियां भूल कर हमेशा अपनी गलतियां याद रखें। हिन्दी मासिक पत्रिका < सुविचार> जब आप किसी को कुछ बता कर कह्तें हैं कि वह किसी को न बताये - लेकिन जब आप खुद उससे अपनी बात नहीं छुपा सके तो दूसरों से भी उम्मीद नहीं रखनी चाहिये। हिन्दी मासिक पत्रिका < सुविचार> यदि आप पूरे जीवन के लिये खुशी पाना चाहते हैं तो अपने द्वारा किये गये हर काम से प्यार करना सीखें। हिन्दी मासिक पत्रिका < सुविचार> कारण में ही निवारण है। हिन्दी मासिक पत्रिका < सुविचार> खुद गलती करने की बजाय दूसरो की गलतियों से सीखो। हिन्दी मासिक पत्रिका < सुविचार> < अपनी तकलीफों को रेत पर लिखें और अपनी उपलब्धियों को संगमरमर पर लिखें। >संकल्पबद्ध होकर किसी कार्य की सिद्धि के लिए किया गया पुरुषार्थ ही व्रत है जबकि उपवास निराहार रहकर आत्मबल बढ़ाने की प्रक्रिया है। < > मित्र और शत्रु , व्यवहार से ही बनाये जाते हैं ।
July 2015